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दीवाली से पहले महंगाई की मार, हिमाचल में घी 100 और मक्खन 130 रुपये महंगा

Posted on: 2026-10-24
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दीवाली की तैयारियों के बीच हिमाचल प्रदेश में घी और मक्खन खरीदने वालों को ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड ने दोनों उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की है। घी के दाम में 100 रुपये प्रति किलोग्राम और मक्खन की कीमत में 130 रुपये प्रति किलोग्राम का इजाफा हुआ है। त्योहार के लिए खरीदारी करने वाले परिवारों के सामने अब इन उत्पादों के लिए अतिरिक्त रकम रखने की जरूरत होगी। सामने आई जानकारी के अनुसार, मिल्कफेड का घी पहले 850 रुपये प्रति किलोग्राम था, जिसकी नई कीमत 950 रुपये हो गई है। वहीं, मक्खन की कीमत 620 रुपये से बढ़कर 750 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। पुराने दाम की तुलना में घी करीब 11.8 प्रतिशत और मक्खन लगभग 21 प्रतिशत महंगा हुआ है। प्रतिशत के हिसाब से मक्खन खरीदने वालों पर ज्यादा असर पड़ेगा।

दीवाली की खरीदारी में पूजा सामग्री, सजावट, उपहार और खाने-पीने की चीजों के लिए अलग-अलग बजट रखा जाता है। ऐसे में घी और मक्खन के लिए बढ़ा खर्च उसी कुल रकम में समायोजित करना होगा। परिवार के पास दो विकल्प होंगे—पहले जितनी मात्रा खरीदने के लिए अतिरिक्त पैसे रखें या तय बजट के भीतर खरीदी जाने वाली मात्रा कम करें। इसका असर प्रत्येक परिवार की जरूरत और खरीदारी की मात्रा के अनुसार अलग होगा। नई दरों के आधार पर गणना करें तो दो किलो घी खरीदने में पहले 1,700 रुपये लगते थे। अब इतनी ही मात्रा के लिए 1,900 रुपये देने होंगे। यानी केवल घी पर 200 रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे। तीन किलो घी खरीदने की स्थिति में यह अंतर 300 रुपये और पांच किलो पर 500 रुपये हो जाएगा। यह गणना बताती है कि ज्यादा मात्रा में खरीदारी करने पर कुल खर्च में अंतर भी उसी अनुपात में बढ़ेगा। मक्खन के मामले में दो किलो की खरीद पहले 1,240 रुपये की पड़ती थी, जबकि नई दर पर इसके लिए 1,500 रुपये लगेंगे। यानी दो किलो पर 260 रुपये ज्यादा देने होंगे। यदि कोई परिवार दो किलो घी और एक किलो मक्खन खरीदता है, तो पहले कुल खर्च 2,320 रुपये होता था। अब यही खरीदारी 2,650 रुपये की होगी। इस उदाहरण में दोनों उत्पादों पर कुल 330 रुपये का अतिरिक्त बोझ बनेगा।

कम मात्रा में खरीदारी करने वाले परिवारों के लिए भी अंतर समझना आसान है। प्रति किलो की दर के अनुपात में देखें तो आधा किलो घी पर 50 रुपये और आधा किलो मक्खन पर 65 रुपये की बढ़ोतरी बैठती है। हालांकि, अलग आकार के पैकेट की वास्तविक बिक्री कीमत उसके मुद्रित अधिकतम खुदरा मूल्य पर निर्भर करेगी। इसलिए प्रति किलो की गणना और दुकान पर उपलब्ध पैक की कीमत को अलग-अलग देखकर खरीदारी करना बेहतर होगा। घर पर पकवान बनाने की योजना में बढ़ी दरों का असर इस्तेमाल होने वाली सामग्री के हिसाब से निकाला जा सकता है। उदाहरण के लिए, किसी तैयारी में कुल एक किलो घी लगता है तो बाकी सामग्री की कीमत समान रहने पर केवल घी की वजह से खर्च 100 रुपये बढ़ेगा। आधा किलो इस्तेमाल होने पर यह अंतर 50 रुपये होगा। इससे परिवार अपनी जरूरत के अनुसार पहले से अनुमान लगा सकते हैं कि तय मेन्यू के लिए कितनी अतिरिक्त राशि चाहिए। व्यावसायिक इस्तेमाल में भी यही गणित लागू होगा। यदि कोई प्रतिष्ठान मिल्कफेड का दस किलो घी खरीदता है, तो पुरानी दर के मुकाबले उसकी खरीद लागत 1,000 रुपये अधिक होगी। दस किलो मक्खन पर अतिरिक्त खर्च 1,300 रुपये बैठेगा। यह केवल संबंधित सामग्री की लागत का उदाहरण है। इससे तैयार मिठाई या अन्य उत्पाद की बिक्री कीमत में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह तय नहीं किया जा सकता। उसका फैसला इस्तेमाल की मात्रा और दूसरे खर्चों पर भी निर्भर करेगा।

खरीदारी करते समय उपभोक्ताओं को उत्पाद का नाम, पैक का वजन और उस पर लिखी कीमत देखनी चाहिए। अलग-अलग आकार के पैकेट की तुलना केवल कुल रकम के आधार पर करने से सही अंतर समझ में नहीं आता। प्रति किलो लागत निकालने पर स्पष्ट होगा कि समान मात्रा के लिए कितना भुगतान हो रहा है। बिल लेने से खरीदे गए उत्पाद और भुगतान का रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहेगा। फिलहाल सामने आई बढ़ोतरी मिल्कफेड के घी और मक्खन से संबंधित है। इसे बाजार के सभी ब्रांड या दूसरे दुग्ध उत्पादों की नई दर नहीं माना जाना चाहिए। उपलब्ध खबर में मूल्यवृद्धि का विस्तृत कारण और लागू होने की सटीक तारीख स्पष्ट नहीं है। इसलिए अन्य उत्पादों के महंगा होने या मिठाइयों की कीमत बढ़ने को अभी निश्चित तथ्य की तरह कहना उचित नहीं होगा। उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल सबसे सीधा बदलाव इन दोनों उत्पादों की खरीद पर बढ़ा खर्च है।

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