छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और पारंपरिक कला को प्रदर्शित करने वाली बस्तर की अनोखी रंगोली ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वनोपज से तैयार की गई लगभग 20,700 वर्गफीट की विशाल रंगोली ने विश्व रिकॉर्ड बनाकर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। इस विशेष कलाकृति के माध्यम से बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत को आकर्षक रूप में उकेरा गया है। रंगोली की खास बात यह है कि इसे तैयार करने में पारंपरिक रंगों के साथ वन क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक उपज और स्थानीय संसाधनों का उपयोग किया गया। इससे न केवल बस्तर की कला और संस्कृति को नई पहचान मिली, बल्कि वनोपज के रचनात्मक इस्तेमाल की संभावनाएं भी सामने आई हैं।
बस्तर अपनी प्राकृतिक संपदा, घने जंगलों, जनजातीय परंपराओं और विशिष्ट हस्तशिल्प के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। यहां के जंगलों से मिलने वाली महुआ, इमली, चार, तेंदूपत्ता और अन्य लघु वनोपज स्थानीय लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार हैं। इन प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग आमतौर पर खाद्य पदार्थों, औषधीय उत्पादों और विभिन्न घरेलू जरूरतों के लिए किया जाता है, लेकिन विशाल रंगोली में इनका कलात्मक इस्तेमाल अपने आप में आकर्षण का केंद्र बना। इस पहल ने यह संदेश भी दिया कि प्रकृति से प्राप्त संसाधनों के माध्यम से स्थानीय संस्कृति को आधुनिक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है।
20,700 वर्गफीट में फैली इस रंगोली को तैयार करना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा होगा। इतने बड़े क्षेत्र में कलाकृति को आकार देने के लिए योजना, रचनात्मकता, सामूहिक प्रयास और बारीकियों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है। रंगोली में बस्तर की पहचान से जुड़े दृश्य और सांस्कृतिक प्रतीक लोगों के आकर्षण का केंद्र बने। इस उपलब्धि से स्थानीय कलाकारों, युवाओं और पारंपरिक कला से जुड़े लोगों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। साथ ही, ऐसी पहलें पर्यटन को बढ़ावा देने और बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने में भी मददगार हो सकती हैं।
यह विश्व रिकॉर्ड केवल एक विशाल रंगोली की उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और प्राकृतिक विरासत को सम्मान देने का अवसर भी है। वनोपज के माध्यम से तैयार इस कलाकृति ने स्थानीय संसाधनों की उपयोगिता और कलाकारों की कल्पनाशीलता को एक साथ प्रस्तुत किया है। बस्तर की यह पहल बताती है कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक रचनात्मक सोच के मेल से अनूठी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। हालांकि, रिकॉर्ड प्रमाणित करने वाली संस्था और आयोजन से संबंधित आधिकारिक विवरणों की पुष्टि के बाद ही रिकॉर्ड की श्रेणी और मान्यता के बारे में निश्चित जानकारी दी जा सकती है। फिलहाल, यह विशाल रंगोली बस्तर की कला, संस्कृति और वन संपदा की विशिष्ट पहचान को सामने लाने वाली उल्लेखनीय पहल के रूप में देखी जा रही है